छींक आने पर आँखें क्यों बंद हो जाती हैं?


·       आइए जानते हैं कि छींक आने पर आंखें क्यों बंद हो जाती हैं।
·       धूल और मिट्टी की एलर्जी के कारण होने वाली सर्दी और छींक को एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम छींक क्यों लेते हैं और छींक आने पर हमारी आंखें क्यों बंद हो जाती हैं?

छींक आने पर आँखें क्यों बंद हो जाती हैं?

·       हो सकता है कि आपने इसके बारे में कभी नहीं सोचा हो या आपको अभी तक इसका जवाब नहीं मिला हो।
·       ऐसी स्थिति में, छींकने के दौरान शरीर कैसे प्रक्रिया करता है और छींकने के दौरान हमारी आंखें बंद क्यों होती हैं। तो चलिए आज पता लगाते हैं।

छींक आने पर आँखें क्यों बंद हो जाती हैं?
·       जब तक साँस लेने की प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी रहती है तब तक छींक नहीं आती है, लेकिन जब धूल मिट्टी या कोई रेशा नाक में फंस जाता है, तो शरीर इसे बाहर निकालने केलिएक्रिया करता है और छींकता है।
·       धूल के कण सांस लेने की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं, इसलिए मस्तिष्क के ट्राइजेमिनल नर्व को एक संदेश भेजा जाता है, जिसके बाद फेफड़े बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन एकत्र करते हैं और जोर से बाहर निकालते हैं।
·       जब ऐसा होता है, तो दबाव के साथ निकलने वाली हवा नाक में फंसे धूल कणों को बाहर निकाल देती है। छींकने की गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है।
·       छींकते वक्त आंखें बंद होने का कारण ट्राइजेमिनल नर्व होती है जो चेहरे, आंखें, मुँह, नाक और जबड़े को नियंत्रित करती है और जब मस्तिष्क द्वारा हर तरह के अवरोध को दूर करने का संकेत मिलता है तो ट्राइजेमिनल नर्व के जरिये ये संकेत आँखों तक भी पहुँच जाता है और इसी वजह से आँखे भी बंद हो जाती हैं।

दोस्तों, नॉलेज गुरु को उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी और यह उपयोगी लगी होगी।
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