2020-05-17


·       आपको बता दें कि कब दिल्ली भारत की राजधानी बनी थी। क्या आप जानते हैं कि भारत की राजधानी पहले दिल्ली नहीं बल्कि कलकत्ता थी.
·       लेकिन 12 दिसंबर 1911 (भारत की मुख्य राजधानी) की घोषणा के बाद दिल्ली को भारत की राजधानी बनाया गया।

दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी थी?


दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी थी?

·       12 दिसम्बर 1911 की सुबह 80,000 से भी ज्यादा लोगों के सामने, ब्रिटेन के किंग  जॉर्ज पंचम ने ये घोषणा की- “हमें भारत की जनता को यह बताते हुए बेहद खुशी होता है कि सरकार और उसके मंत्रियों की सलाह पर देश को बेहतर ढ़ंग से प्रशासन करने के लिए ब्रिटिश सरकार भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करती है।
·       उसके बाद ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर हरबर्ट बेकर और सर एडविन लुटियंस ने नए शहर के लिए योजना बनाई और योजना को अंजाम दिया और इस योजना को पूरा होने में 2 दशक लग गए।
·       इसके बाद 13 फरवरी 1931 को आधिकारिक तौर पर दिल्ली को देश की नई राजधानी बनाया गया।
·       माना जाता है कि दिल्ली शब्द फ़ारसी शब्द 'देहलीज़' से आया है, क्योंकि दिल्ली गंगा की तराई इलाकों के लिए ' देहलीज़' है, जबकि कुछ लोगों  का मानना है कि दिल्ली का नाम तोमर राजा ढिल्लू के नाम पर रखा गया है।
·       1927 में नई दिल्ली का नाम बदल दिया गया और नई दिल्ली में विशाल सड़कें, विशाल भवन, ऑफिस, क्वार्टर, विश्वविद्यालय बनाए गए, जिसके माध्यम से अंग्रेज अपनी छाप छोड़ना चाहते थे।
·       इसलिए उन्होंनेवायसराय हाउसऔरनेशनल वॉर मेमोरियलजैसी इमारतों का निर्माण किया, जिन्हें आजराष्ट्रपति भवनऔरइंडिया गेटकहा जाता है, लेकिन शाहजहाँ द्वारा स्थापित पुरानी दिल्ली कभी भी नई दिल्ली में शामिल नहीं हो सकी।
·       ऐसा माना जाता है कि जब दिल्ली को राजधानी घोषित किया गया था, तब दिल्ली की स्थिति अच्छी नहीं थी।
·       कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे जैसे महानगरों के लिए स्थितियां दिल्ली से बेहतर थीं, लेकिन दिल्ली भौगोलिक रूप से देश के केंद्र में स्थित थी, इसलिए अंग्रेजों ने दिल्ली को भारत की राजधानी बनाने का फैसला किया।

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·       आइये जानते हैं एम्बुलेंस पर नाम उल्टा क्यों लिखा जाता है।
·       एम्बुलेंस (Ambulance) के आगे की तरफ एम्बुलेंस शब्द उल्टा लिखा जाता है।
·       क्या आप जानते हैं एम्बुलेंस पर नाम उल्टा क्यों लिखा जाता है? एम्बुलेंस पर नाम उल्टा लिखने का भी एक कारण है।

एम्बुलेंस पर नाम उल्‍टा क्यों लिखा जाता है?


एम्बुलेंस पर नाम उल्टा क्यों लिखा जाता है?
·       वास्तव में, जब एक एम्बुलेंस गंभीर रूप से बीमार रोगियों को अस्पताल ले जाती है, तो यह काफी तेज गति से चलती है ताकि मरीज को समय पर उपचार मिल सके।
·       ऐसे में एम्बुलेंस पर उल्टा लिखा हुआ ये शब्द इस गाड़ी से आगे चलने वाली गाड़ियों को, उनके पीछे देखने वाले मिरर में सीधा दिखाई देता है जिसे देखने के बाद एम्बुलेंस से आगे चलने वाली गाड़ियां उसे तुरंत रास्ता दे सकें ताकि मरीज को अस्पताल ले जाने में देर ना हो।
·       आप एम्बुलेंस के बारे में जानते हैं कि एम्बुलेंस एक वाहन है जो मरीजों को तुरंत अस्पताल ले जाने का काम करता है।
·       एम्बुलेंस एक वाहन है जिसे आपात स्थिति में यातायात नियमों का पालन नहीं करना पड़ता है क्योंकि इसका काम रोगी को समय पर अस्पताल पहुंचाना है ताकि उसकी जान बचाई जा सके।
·       एम्बुलेंस को भीड़भाड़ वाले मार्गों में तुरंत पहचाना जाना चाहिए और बाहर निकलने के लिए जगह दी जानी चाहिए, इसके लिए एम्बुलेंस को अलग दिखने की जरूरत है और इसलिए दुनिया के देशों में इसे सफेद के अलावा लाल, पीले और नारंगी जैसे चमकीले रंगों में बनाया जाता है। ताकि दूर से ही इसे देखा जा सके और इसे रास्ता दिया जा सके।
·       एम्बुलेंस की आवाज़ इसका इलेक्ट्रॉनिक सायरन है, और एम्बुलेंस में सायरन के अलावा, फ्लैशिंग लाइट, स्पीकर, रेडियो फोन और कई अन्य डिवाइस हैं जिनके माध्यम से वाहन को इस गाड़ी के निकलने के लिए रास्ता छोड़ने की सूचना दी जा सके।
·       शुरुआती सायरन का इस्तेमाल हवा से चला करते थे और बहुत पहले, एम्बुलेंस को केवल घंटियां बजाकर सूचित किया जाता था।

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